ग्रोथ  सपर्ट  यानि विकासीय उछाल —

 

“रोहिन, देख कर चला करो, कभी कुर्सी से टकराते हो, कभी चीज़ें गिराते हो, हो क्या गया है तुमको?”माँ कुछ गुस्से से बोली।
छोटा भाई भी कहाँ चुप रहने वाला था , “झट से बोला ,देखो तो नयी जुराब में से अंगूठा कैसे बाहर निकल रहा है।”

लगभग 11-16 साल की उम्र  में लड़के और लडकियां बहुत तेज़ी से  बढ़ते हैं; मानो अचानक ही प्यारा सा गोलमटोल, बच्चा/ बच्ची  एक अजीब से पतले दुबले, लम्बे ,उद्दंड, बात बात पर तकरार करने  को तैयार, संम्भालने में मुश्किल व्यक्ति में तब्दील होने लगता है।

लड़कियों में यह अवस्था 12-13 वर्ष पर शुरू होती है और 16-18 की आयु तक चलती है ; इस दौरान एक प्यारी सी बच्ची , शारीरिक विकास के इस अजीब से दौर से निकल कर एक सुंदर, आत्मविश्वासी युवा नारी के रूप में समाज में अपना स्थान बनाने को  तैयार  सामने आती है। 

लड़कों में ग्रोथ सपर्ट  थोड़ा देर से आरम्भ होता है, लगभग13-14 से 18 वर्ष की उम्र तक लड़के पूरे व्यस्क हो जाते हैं।

ग्रोथ सपर्ट  के चिन्ह:

*सबसे पहले  बढ़ते हैं, हाथ और पैर। पैरों की उंगलियां जूतों से बाहर निकलने को बेताब रहती है। हर तीसरे,चौथे महीने नए जूते चाहिए रहते हैं।

*शरीर के जोड़घुटने, कोहनियाँ , कंधे बढ़ते ही जाते हैं, लगता है जैसे हड्डियां बढ़ गई हैं इन जोड़ों की। निककर , फ्रॉक ,स्कर्ट , पायजामे फटाफट छोटे होने लगते हैं।

*लड़कियों के हिप्स (नितम्भ) और लड़कों की चेस्ट (छाती) चौड़ी होने लगती है।

*शरीर के बाल गहरे और घने हो जाते हैं, बगलों और जननांगों में हलके बाल आने लगते हैं।

*शरीर से व्यस्क सी गंध आती है और इन सब के साथ ही शुरू होती हैं पिम्पल और मुहांसों की समस्यायें इन का कारण है त्वचा की ग्रंथियों से निकलने वाले मिश्रण।    

*साथ ही ऐसा लगता है  जैसे सारे समय भूख लगी हो , इस सब के चलते बारबार कुछ न कुछ खाने को चाहिए रहता है।

यही समय है जब बहुत से बढ़ते बच्चे मोटे  होने लगते हैं, यदि अभी से स्वस्थ और पौष्टिक भोजन खाने की आदत बना ली जाये तो ज़िंदगी भर मोटापे से बचा जा सकता है। घर का बना ताज़ा भोजन, बाहर बाजार के पिज़्ज़ा , बर्गर आदि से कंही बेहतर है। 

## हम किशोर और किशोरियां का शरीर  इतनी तेज़ी से बढ़ता है कि हमारे मस्तिष्क  का विकास थोड़ा पीछे रह जाता हैइसीलिए हम थोड़े अजीब और अटपटे लगने लगते हैं, कभी कभी गिरते पड़ते से चलते हैं

## इस शारीरिक विकासीय उछाल के चलते , हम शायद कुछ बेडौल और बेढब भी दीखते हैं ; किंतु  जल्द ही हम एक खूबसूरत, स्वाबलंबी व् युवा व्यस्क में बदल कर इस संसार में अपनी जगह बनाएंगे; थोड़ा इंतज़ार करिये। 

रात्रि उत्सर्जन / नाईट ऐमिशन्स —

जैसे ही12 साल का बंटू अंगड़ाइयां लेता हुआ बिस्तर से उठ कर आया, उसकी 7 वर्षीया बहन मुन्नी ताली बजाते, ज़ोर ज़ोर से हंसी और बोली,” माँ देखो भईया ने सोते में सुसु करी है।” बंटू ने सकपका कर अपना पयजामा देखा, वाकई टांगों के बीच गीला था ; बहिन को गुस्से से घूर कर देखा और वापस भागा अपने कमरे की ओर। माँ और पिता जी चाय की चुस्कियां लेते अखबार पढ़ रहे थे। यह सब देख, पिता जी बंटू के पास गए ; वो काफी घबराया हुआ था , रोती आवाज़ में बोला ,” पापा, मुझे नहीं पता यह कब हुआ, मैंने बिस्तर गीला नहीं किया” पिता जी ने पुछा,” क्या ऐसा कभी पहले भी हुआ था ?” बंटू ने बताया,” हाँ , कुछ दिन पहले भी एक बार हुआ था। “
पिता जी ने प्यार से बंटू को अपने पास बिठाया और उसे स्वप्नदोष के बारे में जानकारी दी। इसके बाद से बंटू अपराधबोध से मुक्त हो कर एक बड़े व् ज़िम्मेदार लड़के की तरह व्यवहार करने लगा। सुबह उठ कर सबसे पहले बाथरूम जाता , ठीक से सामने आने योग्य बन कर ही शयनकक्ष से बाहर निकलता ; और हाँ पिता जी के साथ अच्छी दोस्ती सी भी हो गयी।

यह एक स्वाभाविक क्रिया है जिसमें किशोरों और युवा पुरूषों का सोते में ही वीर्य निकल जाता है और उन्हें पता ही नहीं चलता।
इसे स्वप्नदोष भी कहते हैं , जबकि यह कोई दोष या बीमारी नहीं है।
यह भी ज़रूरी नहीं कि जो हस्तमैथुन करते हैं या जनांगों को छूते हैं वे ही इस दशा से गुज़रते हैं ; यह तो बस एक और संकेत है प्रकृति का कि युवावस्था का आगमन हो गया है ; अब लड़के संतान उत्पत्ति कर सकते हैं।

* यदि एक किशोर हफ्ते में दो / तीन बार भी रात्रि उत्सर्जन करता है , तब भी इसका यह मतलब कतई नहीं है कि वह एक गन्दा या बुरा लड़का है या सेक्स के बारे में ही सोचता रहता है, यह युवाओं में होने वाली केवल आम शारीरिक दशा है।
* इससे लिंग के आकार या विकास पर कोई असर नहीं पड़ता।
* कुछ लोगों का मानना है कि इससे वीर्य में स्पेर्म्स की मात्रा कम हो जाती है, यह बिलकुल गलत धारणा है ; बल्कि इस क्रिया के ज़रिये पुराने स्पेर्म्स निकल जाते हैं और शरीर में नए , स्वस्थ शुक्राणु बनते हैं, देखिये प्रकृति किस तरीके से सहायता करती है जीवन के हर स्तर पर !
* स्त्रियों की योनि भी कभी कभी सोते में गीली हो जाती है , यह काफी कम होता है लड़कियों में , इसे पुरुषों के “नाईट ऐमिशन्स” के समान ही मान सकते है, ज़ाहिर है लड़कियों में स्पर्म नहीं होते।