शरीर के अंग और उन्हें छूने के नियम !
एक वास्तविक घटना जो हमारे किसी के भी साथ घट सकती है —
अतुल और गीता अपनी 3 और 6 वर्षीय बेटियों के साथ अपने घनिष्ट मित्र विवेक के घर दिवाली पार्टी के लिए गए। वहां और भी दोस्त अपने बच्चों के साथ आये हुए थे , उनमें से एक का बेटा रोहन करीब 8-9 वर्ष का था ; सभी बच्चे एक कमरे में खेल रहे थे , टीवी देख रहे थे, आपस में व्यस्त थे, सब के माता पिता दुसरे कमरे में ताश खेल रहे थे।
पार्टी जोर शोर से चल रही थी कि अचानक अतुल की ६ वर्षीय बेटी रोती चिल्लाती अपनी माँ के पास भागी आयी , उसने रोते सिसकते माँ को बताया कि रोहन भैया ने अपना पीपी (लिंग यानि पेनिस) दिखाया और कहा,” ये देखो मेरे पास क्या है, छु कर देखो!”
सारी पार्टी का वातावरण बिगड़ गया, अतुल और रोहन के पिता में तो अच्छी खासी लड़ाई हो गयी, बाकी सब भी इस घटना से विचलित हो अपने अपने घर के लिए निकल लिए। किन्तु सभी यही सोच रहे थे कि गलती किसकी है , अपने बच्चों को इन सब के लिए कैसे तैयार किया जाय व् ऐसा कुछ होने पर कैसे रोक लगाई जा सकती है?
अगले दिन ही अतुल और गीता मेरे पास आये , काफी उत्तेजित ,परेशान लग रहे थे , गीता ने सारी बात बताई और कहने लगी।,” मैं अपनी बच्चियों के भोले भाले , मासूम चेहरे देखती हूँ तो मुझे उनकी सुरक्षा की चिंता सताती है।” मेरा उत्तर था, ” हाँ, मैं आपकी दुविधा समझ सकती हूँ , किन्तु हमें अपने बच्चों को ये सब बातें बचपन से ही समझानी होंगी; समस्या से भागना नहीं है, बल्कि उन्हें पहले से तैयार करना है कि कैसे इस समाज में सुरक्षित रहा जाये ?”
इस पर अतुल बहुत घबरा कर बोले,” क्या आप यह कह रही हैं कि हम अभी से इनका दिमाग, बचपन व् इनका भोलापन दूषित कर दें?”
पिता की अपने बच्चों के लिए घबराहट, उन्हें इस तेज़ बदलते ज़माने से बचा कर रखने की कोशिश देख कर, मेरा तो चित्त ही पिघल गया। मैंने उस युवा दंपत्ति को आगाह किया कि आज के दौर में छोटे छोटे बच्चों को भी काफी कुछ सीखiना, समझाना चाहिए ; सब मातापिता यही सोचते हैं कि इस प्रकार की घटनाएं केवल दूसरों के साथ होती हैं , यह एक स्वाभाविक बात है । इसी सोच के चलते वे अपनी ज़िम्मेदारियों को टालते रहते हैं।
प्रत्येक मातापिता को अपने बच्चों को , पुत्र और पुत्रियों दोनों को उनके शरीर से संभंधित निम्नलिखित नियम ज़रूर बताने चाहियें —
छूने के नियम ……
१)आप अपने शरीर के पूरी तरह से मालिक हो।
२)लड़कियोंऔर लड़कों के वो बदन के हिस्से जो तैराकी करते समय ढके रहते हैं उन्हें गुप्तांग कहते हैं।
३) अपने गुप्तांगों के सही नाम जानिये; ताकि यदि कोई आपको उन जगहों पर छूए तो आप सही शब्दों में बता सकें कि क्या हुआ?
४)किसी को भी आपको कहीं भी छूने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
५ )चाहे कोई आपको कोई भी प्रलोभन दे, आप आपने शरीर के किसी भी भाग पर किसी को हाथ न रखने दें।
६ )केवल माता पिता और डॉक्टर को छोड़ कर ; जो आपको स्वस्थ रखना चाहते हैं।
७) यदि कोई आपको तंग करता है, आपको ऐसे छूता है जो आपको अच्छा नहीं लगता ; तुरंत अपने माता पिता, बड़े बहन भाई या शिक्षक को बताएं।
८ ) किसी भी हाल में अपने बदन को ले कर कोई बात छुपाने के लिए राज़ी न हों। ना ही कोई घटना ये सोच कर गुप्त रखें की ये सब आपकी गलती है ।
प्रत्येक बच्चा निहित रूप से गलत छूने और सही छूने के अंतर को समझता है।
*मातापिता और शिक्षकों को बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करना बहुत ज़रूरी है , उन्हें इस बात का विश्वास दिलाना चाहिए कि जब वे कुछ कहते हैं ,
बताते हैं तो हम बड़े उन्हें ध्यान से सुनते हैं, उनकी कही बात को गंभीरता से लेते हैं, और उन पर यकीन करते हैं।
गलतछुवन —
*बच्चों को 3-4 वर्ष की उम्र से ही यह समझाना आवश्यक है कि यदि वे किसी से डरते हैं, उनके आगे जाने से कतराते हैं या शर्म महसूस करते हैं;
यदि वे कोई बात आप से छुपाते हैं, उन्हें किसी तरह की पीड़ा , दर्द की शिकायत है , लेकिन आप से साँझा नहीं करते , तब आप को सतर्क हो जाना
चाहिए व् पूरी तहकीकात करनी चाहिए, अनदेखा न करें।
*किसी भी उम्र के बच्चों के शरीर को बेवजह छूना, छाती, कूल्हों , जननांगों पर हाथ लगाना या होठों , हथेलियों , पैरों के तलवों पर चुम्बन , ये सभी आपत्तिजनक
व्यवहार माना जाता है।
*सगे माता पिता व् बहन भाई को छोड़ कर हर किसी को बच्चों से शारीरिक दूरी बनाये रखनी चाहिए। यह एक ज़रूरी एहतियात है जिसका हम सभी को सम्मान
करना चाहिए।
सही छुवन —
दूसरी ओर देखें तो सर पर हाथ थपथपाना, माथे पर चुम्बन, परिवार जनों का प्यार भरा हल्का सा आलिंगन ये सभी आशीर्वाद और स्नेह के प्रतीक माने जाते हैं।
हमें अपने बच्चों को सही और गलत छुवन का अंतर जितना जल्दी हो सके समझा देना चाहिए। याद रहे सभी माता पिता की अपने शिशुओं के प्रति ये एक अहम् और बहुत ज़रूरी ज़िम्मेदारी है ; इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता !
बच्चों को शरीर के विभ्भिन्न भागों के नाम सिखाएं :
जिस प्रकार हम अपने बच्चों को रंगों के नाम, पशु पक्षियों के नाम, दिनों , महीनों के नाम सिखाते हैं ठीक वैसे ही सहज सरल तरीके से उन्हें शरीर के भागों के सही नाम सीखना भी ज़रूरी है।
उन्हें छाती, वक्षस्थल, जंघा , पुट्ठे , लड़कों का लिंग और लड़कियों की योनि, सब बिना झिझक और बिना शर्म बोध के बताएं।
मानव शरीर का चित्र दिखा कर अंगों की जानकारी दें , और हाँ लड़कों और लड़कियों दोनों के चित्र दिखाएं। अंगों के नाम अपनी दैनिक दिनचर्या में बिना हिचकिचाहट के प्रयोग करें ;
जैसे जब आप शिशु को नहला रहे हैं तब उन्हें बताते रहें ,” अब हम आपकी जांघ साफ़ कर रहे है, पुठों पर साबुन
लगा रहे हैं, अभी आपकी बगल पर पानी डालेंगे, इत्यादि।”
इस प्रक्रिया को एक खेल की तरह लें और सामान्य तरीके से सिखाते जायें।

अब आप कहेंगे इस सब से क्या होगा?
* पहला फायदा- आप का शिशु अपने जननअंगों को जान जायेगा और इन्हें शर्मिंदा होने वाले अंग नहीं समझेगा ।
*दूसरा – वह अपने को अपने शरीर के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझ कर अपने को सशक्त मानेगा/ मानेगी।
*तीसरा- यदि कोई उसे गलत जगह छुएगा तो वह सही शब्दों में सब बता सकेगा/ सकेगी।
*चौथा – आप अपने बच्चों के करीब रहेंगे, जब भी ज़रुरत होगी वे आपसे अपने बढ़ते शरीर की समस्याएं साँझा करने में संकोच नहीं करेंगे।
*आखिर इससे अच्छा क्या हो सकता है की आप के बच्चे आप को अपना मित्र समझें और आप पर उन्हें पूरा विश्वास हो!
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Pooja vashisht
Very good blog, haan hamein apne bacchon ko pehle se sachet karna chahiye.